
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की आरओ-एआरओ भर्ती परीक्षा में धांधली!
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के द्वारा आयोजित की गई आरओ-एआरओ भर्ती परीक्षा को लेकर युवाओं ने धांधली का आरोप लगाया था। सरकार कल तक कह रही थी कि पूरे निष्पक्ष तरीके से परीक्षा सम्पन्न हुई है। जबकि सरकार का ये दावा पूरी तरह से हवा-हवाई था। जिसका न सर था, न पैर बस खोखली बयान-बाजी थी। सच आज सामने आया जब कार्यालय उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने परीक्षा में धांधली की आशंका को माना और एसटीएफ के द्वारा जांच कराए जाने की बात कही। परीक्षा की तैयारी में महीनों से लगे लाखों युवाओं की मेहनत पर पानी फिर गया। आरओ-एआरओ-2023 भर्ती परीक्षा भी धांधली के चलते जांच की भेंट चढ़ गई। साल 2017 में 19 मार्च को योगी आदित्यनाथ ने यूपी के सीएम पद की शपथ ली। युवाओं को लगा सपा-बसपा की सरकारों में हुई भर्तियों की धांधली से निजात मिलेगी और भाजपा की योगी आदित्यनाथ सरकार निष्पक्ष और निर्विवाद भर्ती प्रक्रिया को सम्भव बनाएगी। जबकि विधानसभा चुनाव 2017 से पहले बीजेपी ने ये कहा भी था कि वो भर्तियों में हो रही धांधली रुकवा देगी। तब युवाओं ने भाजपा के वादों पर इतवार किया और विश्वास कर भरोसा कर लिया। हालांकि सिर्फ 4 महीने ही बीते थे। 25 और 26 जुलाई 2017 को यूपी पुलिस दारोगा भर्ती की परीक्षा होनी थी, लेकिन पर्चा लीक हो गया। योगी सरकार की मंशा और भाजपा के वादों की तस्वीरें साफ होती दिखीं। और वहीं जब योगी सरकार के 5 साल पूरे होने में 4 महीने बचे थे। टब 28 नवंबर 2021 को UPTET की परीक्षा होनी थी। परीक्षा हुई भी, लेकिन इस बार भी पेपर लीक हो गया। असल में योगी सरकार में एक-दो नहीं, बल्कि कुल 8 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए। जिसमें करीब 83 लाख लड़के-लड़कियों की मेहनत पर पानी फिर गया।
अक्सर कर खबरें कुछ वक्त बाद वैलिड नहीं होती। लेकिन ये ऐसीं खबरें हैं जो सालों-साल ताजा रहतीं है बस इनकी लिस्ट में तारीखे जोड़ते जाओ और फेहरिस्त लंबी होती जाएगी और पाठकों के लिए ताज़गी का अहसास बरकरार रहेगा। साथ ही सरकार का रवैया और स्टूडेंट्स के हालात दोनों ही आपको जस के तस मिलेंगे। हालात कुछ ऐसे बन चुके है कि अब स्टूडेंट्स के लिए चार ही काम बचे हैं।
पहला, परीक्षा हो जाए इसके लिए धरना दो।
दूसरा, पेपर लीक होने पर विरोध करो।
तीसरा, अगर बाई चांस पेपर हो भी गया तो रिजल्ट का सालों इंतजार करो।
चौथा, रिजल्ट आ भी गया तो ये समझने कि भूल बिल्कुल न करें कि नौकरी लग गई। क्योंकि बहुत चांस है कि शिक्षक भर्ती की तरह उसमें भी गड़बड़ी हो और आपकी मेहनत की माटी-पलीत हो जाये। यानी कुल मिलाकर बस इन्हीं चार चीजों में गोल-मोल घूमते रहो। जिससे इन्हें कोई भी ऐसा मौका न मिले जिसकी वजह से सत्ता को जवाब देना पड़ जाए। वैसे भी सवालों का जवाब दें कौन रहा है। सब अपनी-अपनी सत्ता के मद में चूर हैं। वास्तव में देखा जाए तो यूपी में 2 तरह के लोग हैं, जो हर हाल में मोर्चे पर डटे हुए हैं, पहले- चुनाव प्रचार करने वाले। दूसरे- पेपर लीक और परीक्षाओं के कैंसिल होने से परेशान छात्र। हर दिन छात्रों के प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आ रही हैं
ट्विटर पर तेजी से वायरल होने वाली तस्वीरों में से एक तस्वीर ऐसी भी है जिसमें पुलिस एक युवक को उसके हाथ-पैर पकड़ जबरन टांग कर ले जाते दिख रही हैं। दरअसल ये तस्वीर 69 हज़ार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों में से एक प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी की है। शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी पिछले 600 दिनों से इको गार्डेन के सामने बैठकर धरना दे रहे थे। आज शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पर पहुंचे थे। पुलिस ने टांग कर वापस इको गार्डेन पहुंचा दिया। ये तस्वीरें सरकारों की मंशा पर सवाल खड़े करतीं हैं। और पूछतीं हैं कि जिन युवाओं से कभी आपने वादा किया था कि हम निष्पक्ष और निर्विवाद भर्ती प्रकिया का रास्ता निकलेंगे। आज उन्हें आप अपने दरवाजों से टांग-टांग कर जबरन निकाल रहें हैं। जिनके वोट से आप सत्ता में आये आज उन्हीं से किये वादे को पूरा करने की जगह अपनी चौखट से टांग-टांग कर दूर कर रहे हैं, उनके सवालों से भाग रहे हैं।




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