मोदी महान! लोग परेशान, आखिर किसका कल्याण?

कुछ दिन पहले ही शासन का सबसे लोकप्रिय हथकंडा यानि अघोषित दबाव के चलते कोटेदार यानी सरकारी राशन के दुकानदारों ने खाली थैले जनता को वितरित किये थे। दबाव कुछ ऐसा था कि तत्काल प्रभाव से सारे कोटेदारों ने हर राशनकार्ड धारक को एक खाली थैला दिया था।

अब सवाल उठता है कि राशन की दुकानों पर खाली थैले क्यों बाटे गए थे? आखिर एक खाली थैले से जनता का क्या भला हो सकता था?

नई राशन सामग्री वितरण मशीन

जिस समय खाली थैले बांटे जा रहे थे उस समय चुनावी आचार सहिंता लागू नहीं हुई थी और यहां मैं आपको बता दूं कि वास्तव में खाली थैला बांटने का उद्देश्य यह नहीं था कि जनता का भला किया जा सके बल्कि उसका उद्देश्य तो यह था कि सरकारी तंत्र का उपयोग कर भारतीय जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेता देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रचार-प्रसार किया जा सके। चुनाव सर पर थे, चुनावी आचार संहिता लगने वाली थी इससे पहले ही मोदी की बड़ी-बड़ी फोटो लगे खाली थैले लोगों को कोटेदारों की तरफ से दबाव बनाकर बटवा दिए गए।

सरकारी खर्च पर अपना प्रचार

लेकिन वास्तव में जिस तेजी से कोटेदारों का इस्तेमाल करके यह खाली थैले बांटे गए, इससे साफ है कि मोदी जी जितनी चतुराई से तंत्र का उपयोग कर अपना प्रचार-प्रसार कर रहे हैं, चुनावी माहौल को भुनाने के लिए अगर उसका दस प्रतिशत भी योजनाओं को लागू करने में किया जाता तो देश की सूरत आज कुछ और ही होती।

मशीन में आ रही तकनीकी समस्या

इसका सबसे बेहतर उदाहरण यह है कि राशन की जिन सरकारी दुकानों में खाली थैलों का वितरण किया गया उन सरकारी दुकानों की हालत कुछ ऐसी है कि पिछले दो दिन से लगातार लोगों के द्वारा यह कहा जा रहा है कि जिन मशीनों से राशन को वितरित किया जा रहा है उनका सर्वर ठीक से काम नहीं कर रहा है।

मशीन से गायब सर्वर

लोग परेशान है, पूरा का पूरा दिन दुकानों के बाहर सर्वर के बहाल होने की आस में लोग भूखे-प्यासे बैठे हैं और इसके कुछ सबूत हमारी टीम को मिले हैं इस संबंध में हमारी टीम ने डकोर ब्लॉक के खाद्यान्न इंस्पेक्टर से भी बात की जिसमें पता चला कि जिस समय हमारे द्वारा विभाग से बात की जा रही थी उस समय तक सर्वर काम नहीं कर रहा था।

अव्यवस्था से परेशान कोटेदार

बताया गया कि सर्वर की समस्या मशीनों के बदले जाने के कारण हुई और उनका यह कहना था कि हमें पता नहीं अगले कितने समय तक सर्वर अस्थाई रूप से बंद रहने वाला है।

ग्रुप चैट

अब सवाल उठता है कि जो तंत्र अपने लिए इस्तेमाल किया जा सकता है वह जनता के लिए सुगम क्यों नहीं बनाया जा रहा, क्यों लोग दिन-दिन भर भूखे प्यासे इन सरकारी राशन की दुकानों पर बैठे रहते हैं। ग्रामीण परिवेश के भोले-भाले लोग दुकानदारों को कोश रहे हैं। गालियां दे रहे हैं। सरकारी तंत्र की नाकामी लोगों के लिए मुसीबत बन चुकी है। ये वही तंत्र है जो आदेश पाते ही मोदी जी के बड़े-बड़े फ़ोटो लगे खाली थैले देखते ही देखते जन जन तक पहुंचा देते है वो थैले जिनका जनता से कोई सरोकार नहीं। जबकि जनता के हक़ और अधिकार की चीज उन तक नहीं पहुँच रही है। आखिर क्या वजह है? इस प्रकार से सरकारी तंत्रो का उपयोग और जनता के प्रति निष्क्रियता आखिर कितनी सही है?

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Kraparam Prajapati (K P Singh)

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Kraparam Prajapati (K P Singh)

Journalist, Witter | https://kpmuhana.bio.lonk