
चुनाव आते ही जनता के मुद्दों और उनकी जरूरतों को जानने के लिए देश के तमाम मीडिया हॉउस चुनावी यात्रा पर हैं जो देशभर के तमाम शहरों-गावों की गली-कूचों में लोगों से बात कर रहे हैं. और उनके मुद्दों को जन-जन तक पंहुचा रहे हैं. ऐसी ही यात्रा पर निकली देश के नामचीन मीडिया हॉउस की एक विख्यात इंकार आज दादा माखन लाल चतुर्वेदी की धरती पर पहुंची और खंडवा के लोगों से बात की. जहाँ भाजपा के ढाई साल से सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का कहना था कि हमने विगत वर्षों में खूब विकास किया है. जिस आधार पर जनता हमें एकबार फिर सत्ता में लाने वाली है. वहीँ कांग्रेस प्रत्याशी कांग्रेस के कार्यकाल में हुए विकास कार्य गिनाने में लगे हुए थे. जबकि पास खड़े कुछ लोग किशोर दा के गीत गा रहे थे और डांस कर रहे थे. आप ये मान के चलिए की आजतक की रिपोर्टिंग के मुताबिक देश में सब चंगा है। पर इन सबके बीच भी वही भीड़ में एक-दो युवा ऐसे भी थे जो खंडवा में पसरी बेरोजगारी और जातिगत शोषण कि आवाजें तेज कर रहे थे. खंडवा की महिलाओं की आवाज को तेज करने की जिम्मेदारी लिए महापौर भी दिखीं. जनता के मुद्दों को जन-जन तक ले जाने के लिये आजतक की एंकर स्वयं अंजना ओम कश्यप अपने हेलीकॉप्टर से मैदान में है. ऐसे में लाज़मी है की जब आजतक जैसे बड़े चैनल ज़मीन पर आकर काम करेंगे तो लोगों की आवाज बुलंद होना तय है. आजतक के द्वारा हेलिकोप्टर से शुरू की गई चुनावी यात्रा काफी है ये बताने के लिए की आज भारतीय मीडिया व्यापारिक रूप से कितना मजबूत है? और ये ख़ुशी की बात है की देश का मीडिया आर्थिक रूप से संपन्न हो रहा है. आज जब अंजना ओम कश्यप ने खंडवा की धरती पर अपना वायुयान उतारा तो उनका स्वागत ढोल-नगाड़ों से किया गया. इस प्रकार से गाजे-बजे के साथ एक मीडिया पर्शन का स्वागत हमें ये दर्शाता है की आज लोगों में मीडिया के प्रति सकारात्मक सोच का निर्माण हो रहा है और साथ ही मीडिया की फैन फॉलोविंग भी बढ़ रही है.
कुछ लोगों के संभव है की इस तरह की चुनावी यात्रा ख़ुशी की बात हो! और उनके नजरिये से ये यात्रा जनसाधारण के मुद्दों को भी प्रमुखता से लोगों के बीच लाने का काम कर रही हो.
पर असल में ऐसा नहीं है. जहाँ ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआई) 2023 की 125 देशों की सूची में भारत का स्थान 111 वां हो वहां के मीडिया का इतना संम्पन्न होना की वह चुनावी यात्रा जैसे लम्बे-लम्बे आयोजन हेलीकॉप्टर जैसे खर्चीले माध्यमों से करे पूरा करे, उसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है. ये सोचने वाली बात है कि हेलीकॉप्टर से आने वालों के आस-पास कौन लोग होंगे? पुलिस प्रसाशन से घिरी एक सेलिब्रेटी एंकर से खंडवा के किन लोगों ने चर्चा की होगी? क्या इस चुनावी चर्चा के बीच खंडवा की लेबर चौक पर खड़े होने वाले मजदूरों ने अपने हिस्से के मुद्दे लोगों के बीच रख पाए या रेडी-ठेला लगाने वालों की समस्याए लोगों के सामने पहुंच पाईं? सच तो ये है की आजतक का "राजतिलक" कार्यक्रम राजनीती में दबदबा रखने वाले रसूकदार लोगों तक ही सीमित है. जो भारतीय राजनीती से जुड़े बड़े लोगों तक ही अपनी पहुंच बनाने में सफल हो पा रहा है. असल जनता के मुद्दों को सामने लाने में आजतक का राजतिलक हेलीकॉप्टर प्रोग्राम असफल होता दिख रहा है. इस प्रकार के पब्लिक लोगों में जनता के वास्तविक मुद्दों से दूर कर देतें हैं. नेताओं और पत्रकारों के फैन नहीं होने चाहिए. फैन नेताओं और पत्रकारों की सबसे बड़ी कमजोरी है. अंजना ओम कश्यप का प्रोग्राम राजतिलक पोजीवादिता को बढ़ावा देने वाला प्रोग्राम है जिससे मीडिया में आर्थिक सम्पन्नता प्राप्त करने की होड़ शुरू हो जाएगी और मीडिया हॉउस जनसाधारण के मुद्दों की जगह आर्थिक लाभ को अधिक प्रमुखता देंगें. जिससे पत्रकारिता की पवित्रता पर सवाल खड़े होंगे.





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